मुकेरियां: पंजाब के होशियारपुर जिले का महत्वपूर्ण शहर मुकेरियां इस समय प्रशासनिक अनदेखी और विभागीय सुस्ती की दोहरी मार झेल रहा है। शहर की ...
मुकेरियां: पंजाब के होशियारपुर जिले का महत्वपूर्ण शहर मुकेरियां इस समय प्रशासनिक अनदेखी और विभागीय सुस्ती की दोहरी मार झेल रहा है। शहर की देवा कॉलोनी स्थित गौशाला रोड पर सरकारी बागवानी विभाग की बदहाली और प्रमुख चौकों पर बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों की परेशानियों और सुरक्षा संबंधी खतरों को देखते हुए अब भारतीय मानवाधिकार महासंघ ने मोर्चा खोल दिया है।
कूड़े के ढेर में तब्दील सरकारी बागवानी विभाग: पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भारी संकट
मुकेरियां की देवा कॉलोनी स्थित सरकारी बागवानी विभाग का परिसर, जो कभी अपनी हरियाली और पौधों के लिए जाना जाना चाहिए था, आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। विभाग की सबसे बड़ी लापरवाही इसकी सुरक्षा दीवार (Boundary Wall) का न होना है। बाउंड्री न होने के कारण यह सरकारी जमीन अब शहर का अनौपचारिक 'डंपिंग ग्राउंड' बन चुकी है।
नष्ट हो रही है वनस्पति और संपत्ति
दीवार न होने के कारण आवारा पशु और बाहरी लोग यहाँ आसानी से प्रवेश कर रहे हैं। चारों तरफ फैले कूड़े-कर्कट और गंदगी के ढेर ने न केवल वातावरण को जहरीला बना दिया है, बल्कि विभाग द्वारा तैयार किए गए कीमती पेड़-पौधे भी नष्ट हो रहे हैं। सरकारी संपत्ति का इस तरह बर्बाद होना विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
दीवार न होने के कारण आवारा पशु और बाहरी लोग यहाँ आसानी से प्रवेश कर रहे हैं। चारों तरफ फैले कूड़े-कर्कट और गंदगी के ढेर ने न केवल वातावरण को जहरीला बना दिया है, बल्कि विभाग द्वारा तैयार किए गए कीमती पेड़-पौधे भी नष्ट हो रहे हैं। सरकारी संपत्ति का इस तरह बर्बाद होना विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
आम जनता का जीना मुहाल
गौशाला रोड से गुजरने वाले राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि यहाँ से उठने वाली भीषण दुर्गंध के कारण सांस लेना तक दूषित हो गया है। गंदगी की वजह से बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है, जिससे स्थानीय निवासी खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं।
गौशाला रोड से गुजरने वाले राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि यहाँ से उठने वाली भीषण दुर्गंध के कारण सांस लेना तक दूषित हो गया है। गंदगी की वजह से बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है, जिससे स्थानीय निवासी खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं।
सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे: 'शोपीस' बने माता रानी और महाराणा प्रताप चौक के कैमरे
गंदगी के साथ-साथ शहर की सुरक्षा व्यवस्था भी वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। मुकेरियां के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके माता रानी चौक और महाराणा प्रताप चौक पर लगे सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से खराब पड़े हैं।
अपराधियों को खुली चुनौती
आज के दौर में जहाँ पुलिस प्रशासन 'तीसरी आँख' यानी सीसीटीवी कैमरों पर निर्भर है, वहीं शहर के मुख्य प्रवेश द्वारों और चौकों पर कैमरों का बंद होना अपराधियों को खुली दावत देने जैसा है। यदि इन क्षेत्रों में कोई चोरी, लूट या अप्रिय घटना घटती है, तो पुलिस के पास साक्ष्य जुटाने का कोई साधन नहीं होगा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कैमरों की मरम्मत के नाम पर केवल आश्वासन दिया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
आज के दौर में जहाँ पुलिस प्रशासन 'तीसरी आँख' यानी सीसीटीवी कैमरों पर निर्भर है, वहीं शहर के मुख्य प्रवेश द्वारों और चौकों पर कैमरों का बंद होना अपराधियों को खुली दावत देने जैसा है। यदि इन क्षेत्रों में कोई चोरी, लूट या अप्रिय घटना घटती है, तो पुलिस के पास साक्ष्य जुटाने का कोई साधन नहीं होगा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कैमरों की मरम्मत के नाम पर केवल आश्वासन दिया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
भारतीय मानवाधिकार महासंघ की तीखी प्रतिक्रिया और लिखित शिकायत
इन गंभीर मुद्दों को लेकर भारतीय मानवाधिकार महासंघ ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन के पदाधिकारियों ने मौके का मुआयना करने के बाद प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है।
- विभागीय शिकायत: महासंघ ने बागवानी विभाग और नगर निगम काउंसिल मुकेरियां को लिखित रूप से शिकायत भेजकर अविलंब कूड़े की सफाई और बाउंड्री वाल के निर्माण की मांग की है।
- पुलिस और नगर परिषद को अल्टीमेटम: सुरक्षा के मुद्दे पर महासंघ ने पंजाब पुलिस के स्थानीय थाना प्रभारी और नगर निगम अधिकारियों को सूचित किया है। उन्होंने मांग की है कि माता रानी चौक और महाराणा प्रताप चौक के कैमरों को तत्काल प्रभाव से ठीक करवाया जाए ताकि शहर की निगरानी मजबूत हो सके।
महासंघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे जनता को लामबंद कर बड़ा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
प्रशासनिक चुप्पी और जनता की उम्मीदें
इस पूरी स्थिति में सबसे दुखद पहलू प्रशासन की चुप्पी है। एक तरफ सरकार स्वच्छ भारत अभियान के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर मुकेरियां के केंद्र में स्थित एक सरकारी विभाग गंदगी का केंद्र बना हुआ है। सुरक्षा के दावों के बीच बंद पड़े कैमरे पुलिस की मुस्तैदी की पोल खोल रहे हैं।
प्रमुख मांगें:
- सरकारी बागवानी विभाग के चारों ओर पक्की दीवार का निर्माण हो।
- परिसर में जमा कूड़े के ढेरों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाए।
- शहर के सभी बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों को 24 घंटे के भीतर चालू किया जाए।
- लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय की जाए।
निष्कर्ष:
मुकेरियां की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। गंदगी से बदबू मारती गलियां और असुरक्षित चौक शहर की पहचान बनते जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि भारतीय मानवाधिकार महासंघ की शिकायत के बाद गहरी नींद में सोया प्रशासन जागता है या मुकेरियां की जनता को इन नरकीय स्थितियों में रहने के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।
मुकेरियां की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। गंदगी से बदबू मारती गलियां और असुरक्षित चौक शहर की पहचान बनते जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि भारतीय मानवाधिकार महासंघ की शिकायत के बाद गहरी नींद में सोया प्रशासन जागता है या मुकेरियां की जनता को इन नरकीय स्थितियों में रहने के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, मुकेरियां।


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